बुधवार, 23 मई 2012

कभी रास्ते में उसे निहारा नही वरना वो तो कबसे खड़ा है वहीं.

सिर पर अब भी आसमान की चादर
पैरों तले टिकी है अब भी जमीन
चल रही साँसें अभी तक हमारी
किसी ने तो इन सबको छीना नही

फिर क्यों कभी हो हम उदास
क्या है? जो नही हमारे पास
हमसे तो कभी भी रूठा नही
हमारा जो था अपना वो है वही

जिंदगी दी, जीने की वजह दी
दिखा रहा रास्ता हर सफर में
हमसे अधिक हमारी चिंता करे
यही चाहे सब अपने हमसफर में

एक है ऐसा सबका हमराही
रहे सूरज के साथ रौशनी जैसे
हैं जीवन के साथ ये साँसे जैसे
हो सकता फिर कोई अकेला कैसे

हमने बस उसे पहचाना नही
कभी अकेलेपन में पुकारा नही
कभी रास्ते में उसे निहारा नही
वरना वो तो कबसे खड़ा है वहीं.

8 comments:

रविकर फैजाबादी ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति ।

आभार ।।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच है, वह तो वहीं पर है, जहाँ पर आप छोड़ आये हैं।

रविकर फैजाबादी ने कहा…

मित्रों चर्चा मंच के, देखो पन्ने खोल |

आओ धक्का मार के, महंगा है पेट्रोल ||

--

शुक्रवारीय चर्चा मंच

वाणी गीत ने कहा…

वह तो वही है , हम ही राह भूले हैं !
सुन्दर गीत !

Rajesh Kumari ने कहा…

बहुत सुन्दर भक्तिमय भाव लिए सहज सुन्दर प्रस्तुति

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

बहुत सुंदर

सादर।

prritiy---------sneh ने कहा…

bahut sunder rachna
shubhkamnayen

prritiy---------sneh ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.