सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

जिसके है उसके हो जाए,फिर हमारी जरूरत उसकी जिम्मेदारी.

दुःख भी है,भोगते भी है
पर भुला देना चाहते हैं.
पर भूल भी नही पाते क्योंकि
एक बाद दूसरे आ जाते हैं.

जन्म से लेकर अब तक
मिला सुख का एक क्षण तक नही.
सुख समझा वो भी दुःख ही था
फिर भी जीने से भरता मन नही.

पैदा हुए रो रो कर और
आगे हर पग पे समझौते किये.
फिर भी भाग रहे हैं आँखें मूँद
पता नही क्या आस लिए.

जीवन का एक हिस्सा दुःख है
मन बहलाने के ख्याल है.
क्योंकि हक है हमारा सुख पे
बस अपनाने का सवाल है.

जिससे हम आये हैं वो आनंद में जीता है
फिर हमारी नियती दुःख कैसे.
बाप से बगावत कर जिसने बसायी दुनिया
हमारा हाल उस बेटे के जैसे.

जिसके है उसके हो जाए
फिर हमारी जरूरत उसकी जिम्मेदारी.
हमसे पहले पता होता उसे
क्या है वास्तविक जरूरत हमारी.

2 comments:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत ही सुन्दर फोटो है कन्हैया के.......बडा प्यारा बलोग है......

वन्दना ने कहा…

्यही सत्य है वो जानता है मगर हम ही दखल अन्दाज़ी करते हैं………सुन्दर प्रस्तुति।