गुरुवार, 16 दिसंबर 2010

रूठो न राधा ऐसे मुझसे,मांगे माफी कान्हा तुझसे.

रूठो न राधा ऐसे मुझसे

मांगे माफी कान्हा तुझसे.

तेरे बिना मै जाऊं कहाँ
कृष्णा वहाँ, है राधा जहाँ.

विनती करूँ,पैयां परू
जो दे सजा वो सिर पे धरूं.

पर हो न उदास हे ब्रज की रानी
कृष्ण की आराधिका,ब्रज की पटरानी.

मेरी ठिठोली न दिल पे धरो
इतना न अब मान करो .

मान भी जाओ हे प्राण प्रिय
गलती बता दो जो मैंने किये.

रूठो न राधा ऐसे मुझसे
मांगे माफी कान्हा तुझसे.

2 comments:

वन्दना ने कहा…

वाह कान्हा का माफ़ी का अन्दाज़ बहुत ही बढिया लगा और आपका ब्लोग कान्हा प्रेम से सराबोर है बहुत ही सुन्दर चित्र लगाये हैं।

Patali-The-Village ने कहा…

कृष्ण लीला अच्छी लगी | धन्यवाद|