मंगलवार, 13 जुलाई 2010



जगत के नाथ जनन्नाथ
जग दर्शन को हैं निकले आज
ये दिन बड़े ही दुर्लभ होते
दौड़ पडो छोड़ सब काज

भक्त वत्सल भगवान
मंदिर से निकल आये हैं
दया,करुणा,वत्सलता
सब पर ही बरसाए हैं

एक बार जो कर ले दर्शन
कोटि जन्म के पाप कट जाए
खींच लिया जो रस्सा रथ का
जन्म-मृत्यु की रस्सी कट जाए

प्रभु के नखरे
भक्त की ठिठोली
शरारतें प्रभु की
भक्त की बोली

कभी वो रथ पर ही
नही आते
कभी चलते-चलते
रुक जाते

अगर दर्शन देना चाहते कहीं
तो फिर प्रभु वही रुक जाते
आज भक्त भगवान के पास नही
भगवान भक्त के पास हैं आते

ऐसी ही लीलाएं प्रभु की
सुलभ होती सबके लिए
जगन्नाथ आज निकले हैं
दाऊ,सुभद्रा को साथ लिए.

जय जगन्नाथ!जय बलदेव! जय सुभद्रा!

5 comments:

Jandunia ने कहा…

शानदार पोस्ट

Kshitij ने कहा…

best ! just best
जय जगन्नाथ!जय बलदेव! जय सुभद्रा!

Virender Rawal ने कहा…

nice devotional post .
may u get divine krishn in ur life.

अरुणेश मिश्र ने कहा…

प्रशंसनीय ।

bilaspur property market ने कहा…

भक्ति दे दो हे भक्त वत्सल