आँसू जो तेरे चरणों के लिए
गुरुवार, 23 सितंबर 2010
कब मेरी भक्ति की शुरुआत होगी
गुरुवार, 8 जनवरी 2009
रिश्ता जुड़े तो सिर्फ़ भगवान से
सुध-बुध ही नही रहती जग की
काश मै मीरा बन पाती
कांटे भी नही दिखती पग की
कान्हा के डगर पे चलती जाती
एक नाम बस कान्हा का ले
उसमे ही ख़ुद को रमाती
जग के जंजालों में न फँसती
उसमे कभी जी ही न लगाती
ये दुनिया तो बस माया है
सब यहाँ अपने स्वार्थ को जीते
अमृत तो है बस एक नाम प्रभु का
जिस में बिना सोचे विष भी पीते
भक्ति मिले तो ऐसी मिले कि
मोह न रह पाए फ़िर किसी इन्सान से
पर बड़ा मुश्किल है मिलना ये सुख
कि रिश्ता जुड़े तो सिर्फ़ भगवान से
इतनी कृपा बस कर दो आप
भर दो मेरे सांसों और लहू में भक्ति
अब न रहा इतना हौसला मुझमे
न रही तेरी माया से लड़ने की शक्ति
भक्ति के बिना जीवन ये अपना
लगे बिल्कुल ही अधूरा-अधूरा
अधूरे को साथ ले कब तक चलूँ
बना दे कृष्णा इसको अब पूरा
शुक्रवार, 2 जनवरी 2009
लक्ष्य
हर परिस्थिति, हर स्थिति में
हमारा ध्यान उससे कभी डिगे नही
कितनी भी बारिश हो मुश्किलों की
हौसला उससे लिए भींगे नही
न कमजोर पड़े किसी जोड़ से
न टूट पाए किसी भी तोड़ से
जिसे पाने का जुनून
बन जाए जीने का मकसद
हर काम हमारा जिसके लिए
हो जिसके लिए हमारी हर मसक्कत
सब जगह उसकी ही जगह रहे
सपने या हकीकत हर कही
ऐसा ही कुछ तय करे अगर
तो लक्ष्य कहलाता है वही
जैसा कि एक लक्ष्य है
कृष्ण प्रेम को पाना
उसको पाने के लिए भी पड़ता
बस उसी का हो जाना

